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लॉकडाउन: मुंबई से राजस्थान लौटे मजदूर, खेतों में ही किए गए क्वारनटीन

- राजस्थान आए कारीगर गांव से बाहर खेतों में क्वारनटीन
- टेंपरेरी क्वारनटी सेंटर में महाराष्ट्र से आए 8-10 कारीगर रह रहे
देश के अलग-अलग राज्यों में मजदूरों के महा पलायन का सिलसिला जारी है. ऐसे में राज्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को संक्रमण से बचाए रखने के लिए क्वारनटीन में रखना है. राजस्थान के एक गांव में महाराष्ट्र से आने वाले कारीगरों को घर जाने के पहले खेतों में ही 15 दिन के लिए क्वारनटीन कर दिया गया है. उदयपुर से 40 किलोमीटर दूर बर्ड विलेज के नाम से मशहूर मेनार गांव के काफी युवा महाराष्ट्र, गुजरात समेत दुनिया के कई देशों में खानसामे का काम करते हैं.
कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने के बाद जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा हुई, तो बहुत सारे लोग वापस लौटने लगे. 40 से 45 कारीगरों की ऐसी ही टोली हाल ही में महाराष्ट्र से लौटे, लेकिन उन्हें मेनार गांव के अंदर जाने नहीं दिया गया, बल्कि गांव से 2 किलोमीटर दूर खेतों में ही उन्हें क्वारनटीन कर दिया गया है.
अलग-अलग खेतों में क्वारनटीन
खेतों के बीचोबीच बने इस टेंपरेरी क्वारनटी सेंटर में 8 से 10 कारीगर रह रहे हैं, जो महाराष्ट्र से आए हैं. राजस्थान की गर्मी अपने आप में चुनौती भरी है. गांव के को-ऑर्डिनेटर रमेश चंद्र सिंह रावत हर सुविधा मुहैया करवाते हैं.
रमेश का कहना है, 'हमने 10 लोगों की टीम बनाई है. जो लोग भी बाहर से आते हैं उन्हें गांव से बाहर रोककर सबसे पहले टेस्ट करवाया जाता है. फिर उनकी सुविधानुसार खेतों पर या कुएं के पास वहां व्यवस्था करते हैं, जहां उन्हें खाने-पीने की भी व्यवस्था दी जाती है. लगातार उनके टेस्ट किए जा रहे हैं. मेनार में अब तक 45 से ज्यादा लोगों को अलग-अलग खेतों में क्वारनटीन के लिए रखा गया है. इनमें से कुछ सूरत, अहमदाबाद, महाराष्ट्र या चेन्नई से आए हैं.
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गांव के दूसरे युवक रामकुमार का कहना है, 'गांव के लोगों को डर है कि यह बाहर से आए हैं और अगर बीमारी फैल गई तो खतरा बढ़ जाएगा, इसलिए हमने एहतियातन सेल्फ डिफेंस के लिए यह व्यवस्था की है.'
फिलहाल गांव के भीतर प्रवेश वर्जित
उदयपुर जिला राजस्थान में रेड जोन बना हुआ है और वहां कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए पूरे जिले में कर्फ्यू जैसी स्थिति है. दूरदराज राज्यों से वापस आने वाले मजदूरों को देखते हुए पुलिस ने भी गांव के बाहर नाका लगा रखा है.
गांव के भीतर किसी का भी प्रवेश वर्जित है. बाहर से आने वाले लोगों को पंचायत न सिर्फ मेडिकल टेस्ट करवाती है, बल्कि उन्हें क्वारनटीन प्रक्रिया का भी पालन करना होता है. बैरिकेड के पास ड्यूटी कर रहे पुलिस वाले भी गांव की मदद कर रहे हैं, तो गांव वाले भी उनका पूरा समर्थन कर रहे हैं.
खेतों में रहने वाले पेशे से खानसामा ये सभी युवक पिछले 6 दिनों से क्वारनटीन में हैं. अंबालाल कहते हैं कि 7 दिन पहले मुंबई से चला था और यहां आने के बाद पहले अस्पताल में टेस्ट हुआ. फिर हम यहां आ गए. अंबालाल की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी.
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वहीं, मौसम की मार क्वारनटीन सेंटर पर ऐसी पड़ी कि हाल ही में बनाया हुआ टेंट भी उजड़ गया, लेकिन सर पर दोबारा प्लास्टिक की छत बना दी गई है. पास ही में किचन है जहां वे खुद अपना खाना बनाते हैं. कुंए का पानी नहाने और पीने के काम आता है. वक्त मुश्किल है बावजूद इसके कोई भी क्वारनटीन को तोड़कर गांव में नहीं जाना चाहता.
प्रशासन के दबाव में नहीं, खुद यहां हैं
भूपेंद्र महाराष्ट्र में कुक की नौकरी करते थे. अब जब गांव पहुंचे तो फिलहाल क्वारनटीन में हैं. भूपेंद्र ने कहा, 'हमारे मन में ऐसा कभी नहीं आया कि हम नियम तोड़ें, क्योंकि हमें हमारे गांव को बचाना है, इसलिए किसी प्रशासन के दबाव में नहीं बल्कि खुद से हम यहां रहने आए हैं. मौसम खराब हुआ था. आंधी-तूफान आया तो हमारे टेंट भी फट गए थे, लेकिन हम फिर से बना लेंगे. फिलहाल गांव से हम मदद नहीं लेना चाहते, हालांकि गांव वाले मदद करना चाहते हैं, लेकिन हम उन्हें मना कर देते हैं. 10-15 दिन की बात है, यह वक्त भी चला जाएगा.'
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लक्ष्मण मुंबई के कपड़े की दुकान में काम करते थे. 20 मार्च को दुकान बंद हो गई और 22 मार्च के बाद लॉकडाउन जारी हो गया. वापस अपने गांव राजस्थान आ गए, लेकिन सीधे परिवार से मिलने नहीं गए. लक्ष्मण कहते हैं, टेंट बनाने से लेकर खाने-पीने और बिस्तर की व्यवस्था हमने खुद से की है.
Credit Aaj Tak
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